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भारत से दुनिया डरती नहीं, प्रेरित होती है.........सीए सुधीश शर्मा

 BBT Times, बीकानेर

26 जनवरी विशेष बीबीटी टाइम्स के सम्पादक "दिनेश गुप्ता" की ख़बर

बीकानेर, 25 जनवरी।  आज जब भारत विश्व मंच पर तेज़ी से उभरती हुई महाशक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है, तब यह कहना अतिशयोक्ति नहीं कि भारत अब केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि एक वैश्विक प्रेरणा बन चुका है। भारत आज दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और शीघ्र ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है
आज जब भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर चुका है और आने वाले वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का रास्ता तय कर रहा है, तब कोई आश्चर्य नहीं कि पूरी दुनिया भारत की ओर ताक्त और सम्मान के साथ देख रही है। भारत की जीडीपी में पिछले वर्षों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है और अनुमान है कि यह जल्द ही अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर आ सकता है।  

यह सिर्फ संख्याओं की जीत नहीं है, बल्कि भारत की जिम्मेदार, नैतिक और सकारात्मक वैश्विक भूमिका का प्रतीक है। 2026 के Responsible Nations Index में भारत ने 154 देशों में बेहतर रैंक हासिल किया है, जबकि अमेरिका और चीन उससे पीछे हैं। इससे स्पष्ट होता है कि विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा, जिम्मेदारी और नैतिकता में भारत आज अग्रणी स्थान पर है।  

हालाँकि अमेरिका और चीन अभी आर्थिक आकार में भारत से आगे हैं, लेकिन प्रतिष्ठा, भरोसे, नैतिकता और वैश्विक स्वीकार्यता के स्तर पर भारत की स्थिति कहीं अधिक मजबूत होती जा रही है। भारत की पहचान आज एक ऐसे राष्ट्र के रूप में बन रही है जो शक्ति नहीं, बल्कि सहयोग से नेतृत्व करता है।

जहाँ कुछ देशों की विदेश नीति शक्ति प्रदर्शन, दबाव और प्रभाव विस्तार पर केंद्रित रही है, वहीं भारत ने हमेशा “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के साथ दुनिया को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई है। भारत आज वैश्विक मंच पर ग्लोबल साउथ की आवाज़, विकासशील देशों का भरोसेमंद साथी और मानवता आधारित समाधान प्रस्तुत करने वाला देश बन चुका है।

भारत के नागरिक आज दुनिया के हर कोने में अपनी प्रतिभा, ईमानदारी, कार्यसंस्कृति और नैतिक मूल्यों के लिए पहचाने जाते हैं। चाहे अमेरिका हो, यूरोप, मध्य पूर्व या एशिया — भारतीय डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, प्रोफेशनल और उद्यमी उन देशों की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, बिना किसी नकारात्मक या विघटनकारी भूमिका के।

यही कारण है कि आज वैश्विक शक्तियाँ भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि भविष्य की निर्णायक शक्ति के रूप में देख रही हैं। भारत से डर नहीं है — बल्कि भारत की गति, सोच और नेतृत्व क्षमता से प्रतिस्पर्धा और आशंका दोनों हैं।

आज का भारत युद्ध नहीं, विकास चाहता है। प्रभुत्व नहीं, साझेदारी चाहता है। टकराव नहीं, समाधान चाहता है।
यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है — और यही कारण है कि भारत आने वाला नहीं, बल्कि नेतृत्व करने वाला राष्ट्र बन चुका है।

26 जनवरी पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए कि हम उस देश के नागरिक हैं, जिसकी पहचान अब शक्ति नहीं, बल्कि चरित्र से होती है। 

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