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केसरिया हनुमान मंदिर की रामकथा में सीता हरण, शबरी पर कृपा और हनुमान मिलन के प्रसंगों ने बांधा समां

 BBT Times, बीकानेर


 

बीकानेर, 9 मई ! केसरिया हनुमान मंदिर की रामकथा में सीता हरण, शबरी पर कृपा और हनुमान मिलन के प्रसंगों ने बांधा समां
बीकानेर स्थित प्राचीन केसरिया हनुमान मंदिर के 82वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य रामकथा महोत्सव में शनिवार को रामायण के अत्यंत महत्वपूर्ण एवं भावपूर्ण प्रसंगों का रसपूर्ण वर्णन किया गया। आज कथा में सीता हरण, शबरी पर प्रभु श्रीराम की कृपा, हनुमान जी से प्रथम भेंट, श्रीराम-सुग्रीव मित्रता तथा माता सीता की खोज के लिए हनुमान जी एवं वानर सेना के प्रस्थान का मार्मिक चित्रण किया गया। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
रामकथा वाचन कर रहे पंडित केशव शुक्ला ने बताया कि आज की कथा का आरंभ सीता हरण के प्रसंग से हुआ। उन्होंने कहा कि जब रावण छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लंका ले गया, तब प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण अत्यंत व्याकुल हो उठे। इस प्रसंग का वर्णन सुन श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और कथा पंडाल में गंभीर वातावरण छा गया।
इसके पश्चात शबरी प्रसंग का वर्णन करते हुए पंडित जी ने बताया कि प्रभु श्रीराम जब माता शबरी के आश्रम पहुंचे, तब शबरी ने प्रेमपूर्वक जूठे बेर अर्पित किए, जिन्हें प्रभु ने स्नेहपूर्वक स्वीकार किया। इस प्रसंग से भक्ति में भाव, समर्पण और निष्कपट प्रेम का संदेश मिला। श्रद्धालु इस प्रसंग को सुनकर मंत्रमुग्ध हो गए।
कथा में आगे हनुमान जी से प्रभु श्रीराम की प्रथम भेंट का सुंदर वर्णन किया गया। पंडित जी ने कहा कि हनुमान जी ने ब्राह्मण वेश धारण कर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण से परिचय प्राप्त किया तथा उन्हें सुग्रीव के पास ले गए। प्रभु और हनुमान जी का यह मिलन सुनते ही कथा स्थल जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयकारों से गूंज उठा।
इसके बाद श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का प्रसंग सुनाया गया। पंडित जी ने बताया कि प्रभु श्रीराम ने सुग्रीव को भयमुक्त कर उनका राज्य दिलाने का संकल्प लिया, वहीं सुग्रीव ने माता सीता की खोज में पूर्ण सहयोग का वचन दिया। यह प्रसंग मित्रता, विश्वास और सहयोग का अद्भुत संदेश देने वाला रहा।
कथा के अंत में हनुमान जी एवं वानर सेना द्वारा माता सीता की खोज के लिए चारों दिशाओं में प्रस्थान का उत्साहपूर्ण वर्णन किया गया। पंडित जी ने कहा कि प्रभु श्रीराम का कार्य पूर्ण करने हेतु हनुमान जी और वानरों ने अद्भुत पराक्रम, निष्ठा और समर्पण का परिचय दिया। इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं में ऊर्जा और उत्साह का संचार कर दिया।
इस अवसर पर भजनों की मधुर प्रस्तुतियों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए और पूरा मंदिर परिसर रामनाम से गुंजायमान हो उठा।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अंजनी कुमार शुक्ला ने बताया कि 82वें स्थापना दिवस पर आयोजित यह रामकथा महोत्सव प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा का केंद्र बनता जा रहा है। आगामी दिनों में रामायण के अन्य प्रमुख प्रसंगों का भी भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा। बड़ी संख्या में भक्तजन प्रतिदिन कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं। 

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