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बीकानेर की 5 वर्षीय लाडली महान्या सिंह राजपुरोहित ने रचा इतिहास, दो वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर बढ़ाया शहर का मान

 BBT Times, बीकानेर





बीकानेर, 9 मई ! प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, इस कहावत को बीकानेर की मात्र 5 वर्षीय बाल प्रतिभा महान्या सिंह राजपुरोहित ने सच कर दिखाया है। अपनी असाधारण शारीरिक क्षमता, तेज स्मरण शक्ति और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर महान्या ने ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिससे बीकानेर ही नहीं बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित होने का अवसर मिला है। नन्ही महान्या ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराते हुए नया इतिहास रच दिया है।

महान्या भाजपा नेता गुमान सिंह राजपुरोहित की पौत्री हैं। इतनी कम उम्र में उनकी उपलब्धियों ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है। परिवार, समाज और खेल जगत में इस सफलता को लेकर उत्साह और गर्व का माहौल है।

6 मिनट 18 सेकंड में 50 कार्टव्हील कर दिखाया कमाल

रिकॉर्ड प्रदर्शन के दौरान महान्या ने अपनी शारीरिक चपलता और मानसिक क्षमता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। उन्होंने मात्र 6 मिनट 18 सेकंड में लगातार 50 कार्टव्हील कर दिखाए, जो अपने आप में असाधारण उपलब्धि है।

विशेष बात यह रही कि हर कार्टव्हील के साथ वे टेलीविजन स्क्रीन पर दिखाई दे रहे विभिन्न देशों के झंडों की पहचान करती रहीं। इतना ही नहीं, उन्होंने हर देश का नाम, उसकी राजधानी और वहां स्थित यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का नाम भी सटीकता से बताया। यह प्रदर्शन देखकर निर्णायक मंडल सहित उपस्थित सभी लोग मंत्रमुग्ध रह गए।

जिम्नास्टिक के साथ तीरंदाजी में भी दक्ष

महान्या केवल जिम्नास्टिक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक प्रशिक्षित तीरंदाज भी हैं। इतनी कम उम्र में खेलों के प्रति उनका समर्पण और अनुशासन अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा बन रहा है। परिवार द्वारा उन्हें बचपन से ही खेल और रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।

नन्ही उम्र में बनीं लेखिका, किताब बनी बेस्ट सेलर

महान्या ने खेल जगत के साथ साहित्य क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है। उनकी पहली पुस्तक “Mahanya – The Warrior on the Mat” हाल ही में प्रकाशित हुई है। यह पुस्तक बच्चों के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है, जिसमें साहस, कल्पना, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का संदेश दिया गया है।

बताया जा रहा है कि यह पुस्तक वर्तमान में अमेजन पर बेस्ट सेलर श्रेणी में ट्रेंड कर रही है, जो महान्या की उपलब्धियों में एक और नया अध्याय जोड़ती है।

सफलता का श्रेय माता-पिता और परिवार को दिया

अपनी सफलता पर महान्या ने बेहद परिपक्वता के साथ कहा कि इस उपलब्धि का पूरा श्रेय उनके माता-पिता और परिवार को जाता है। उन्होंने बताया कि परिवार ने घर पर अभ्यास की विशेष व्यवस्था की, साथ ही उन्हें पेशेवर प्रशिक्षण भी दिलाया।

महान्या ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भारत का तिरंगा लहराना है।

परिवार और शहर में खुशी की लहर

महान्या की इस उपलब्धि से उनकी माता प्रतिभा सिंह, पिता पुष्पेंद्र सिंह राजपुरोहित सहित पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। राजपुरोहित समाज, खेल प्रेमियों और शहरवासियों ने नन्ही प्रतिभा को शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पर भी महान्या को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

बीकानेर की यह नन्ही बेटी आज हजारों बच्चों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है। महान्या ने यह साबित कर दिया कि यदि लगन, मेहनत और परिवार का सहयोग हो तो छोटी उम्र भी बड़े सपनों की राह में बाधा नहीं बनती। 

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