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किसान दिवस पर NRCC ने पशुपालकों को दिया 'स्वच्छ दूध उत्पादन' का प्रशिक्षण

 BBT Times,बीकानेर 

 


बीकानेर, 23 दिसम्बर।  राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (NRCC), बीकानेर द्वारा किसान दिवस (23 दिसंबर) के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम पशुपालकों के सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

यहाँ आपके द्वारा साझा किए गए समाचार के मुख्य बिंदु और उनके महत्व का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:

1. किसान दिवस और स्वच्छता पखवाड़ा का संगम

NRCC ने न केवल पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती (किसान दिवस) मनाई, बल्कि इसे 16-31 दिसंबर तक चलने वाले 'स्वच्छता पखवाड़ा' से भी जोड़ा। यह दर्शाता है कि कृषि में स्वच्छता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण कितने महत्वपूर्ण हैं।

2. स्वच्छ दूध उत्पादन पर प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य केंद्र "स्वच्छ दूध उत्पादन" रहा। स्वच्छ दूध न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए बेहतर है, बल्कि इसकी बाजार में कीमत भी अधिक मिलती है।

  • थनैला रोग (Mastitis) से बचाव: डॉ. काशी नाथ ने इस गंभीर बीमारी और स्वच्छता के बीच के संबंध को समझाया, जो डेयरी किसानों के लिए आर्थिक नुकसान का एक बड़ा कारण है।

3. ऊंटनी के दूध का व्यवसायीकरण

डॉ. वेद प्रकाश ने राजस्थान के संदर्भ में एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात कही—ऊंटनी के दूध की बढ़ती मांग। वर्तमान में औषधीय गुणों के कारण ऊंटनी के दूध का बाजार बढ़ रहा है, जो बीकानेर के पशुपालकों के लिए आय का एक नया और बड़ा स्रोत बन सकता है।

4. सरकारी योजनाओं और संसाधनों का लाभ

  • SCSP योजना: इसके तहत 65 पशुपालकों को न केवल प्रशिक्षण दिया गया, बल्कि कृषि संबद्ध संसाधनों का वितरण भी किया गया।

  • केंद्रीय मंत्रियों का मार्गदर्शन: ऑनलाइन बैठक के माध्यम से माननीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और श्री भागीरथ चौधरी के संबोधन ने किसानों को राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका के प्रति प्रोत्साहित किया।


एक नज़र में कार्यक्रम के मुख्य वक्ता: | नाम | पद | मुख्य संदेश | डॉ. अनिल कुमार पूनिया | निदेशक, NRCC | पशुपालकों की आय में सुधार हेतु वैज्ञानिक ज्ञान का महत्व। | | डॉ. समर कुमार घौरुई | प्रधान वैज्ञानिक | सरकारी योजनाओं और समन्वित खेती (Integrated Farming) का लाभ। | | डॉ. अरूणा कुनियाल | नोडल अधिकारी | स्वच्छता को एक संस्कृति और जिम्मेदारी के रूप में अपनाना। |

यह जानकर अच्छा लगा कि बीकानेर के ग्रामीण क्षेत्रों (परवा, गीगासर, गाढ़वाला आदि) के पशुपालक इन आधुनिक तकनीकों से जुड़ रहे हैं।


 

 

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