BBT Times, लूणकरणसर/बीकानेर
बीबीटी टाइम्स के सम्पादक दिनेश गुप्ता की ख़बर
बीकानेर, 1 अप्रैल। शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में लूणकरणसर क्षेत्र के सोढवाली गांव में आयोजित गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा का आध्यात्मिक आयोजन निरंतर श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी है। आयोजन के चौथे दिन वातावरण पूरी तरह भक्ति, साधना और वैदिक मंत्रों की दिव्यता से ओत-प्रोत रहा।
कार्यक्रम के अंतर्गत विश्व शांति और समस्त प्राणीमात्र के कल्याण की भावना से गायत्री महामंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र के उच्चारण के साथ विधिवत आहुतियां दी गईं। यज्ञ स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूर्ण आस्था के साथ यज्ञ में भाग लेते हुए आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। इस दौरान पुंसवन संस्कार भी संपन्न कराया गया, जिसमें यज्ञ आचार्य ने वैदिक संस्कारों की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति में प्रत्येक संस्कार का गहरा वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक आधार है, जो व्यक्ति के जीवन को संस्कारित और श्रेष्ठ बनाता है।
प्रज्ञा पुराण कथा के दौरान कथावाचक करनी दान चौधरी ने जीवन को देवतुल्य बनाने की साधना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत मूल्यवान है और इसे श्रेष्ठ बनाने के लिए समझदारी, जिम्मेदारी, बहादुरी और ईमानदारी जैसे गुणों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने जीवन में इंद्रिय संयम, समय संयम, विचार संयम और अर्थ संयम को अपनाने का संदेश देते हुए बताया कि यही तत्व व्यक्ति को आत्मिक उन्नति की ओर ले जाते हैं।
सायंकालीन सत्र में दीप यज्ञ का आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। दीप यज्ञ का संचालन जगजीत सिंह द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने प्रत्येक परिवार तक ज्ञान और संस्कारों का प्रकाश पहुंचाने की प्रेरणा दी। श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
इस अवसर पर पवन कुमार औझा ने युग संगीत की भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह में आस्था और भक्ति का संचार किया। उनके गीतों ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
आयोजन को सफल बनाने में बाबू सिंह, महावीर सिंह, मनोहर सिंह और हनुमान सिंह सहित अनेक कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान गांव में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित कर रहे हैं।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत कर रहा है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और संस्कारों के प्रसार का भी सशक्त माध्यम बन रहा है।


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