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दिनेश गुप्ता की विशेष रिपोर्ट बीकानेर में चाइनीस मांझा बना जानलेवा: मासूम की मौत से उठे सवाल, आखिर कब लगेगी रोक?

 BBT Times, बीकानेर



बीकानेर, 18 अप्रैल। धार्मिक नगरी और “छोटी काशी” के नाम से पहचाने जाने वाले बीकानेर शहर में इन दिनों चाइनीस मांझा गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। जहां एक ओर आखातीज (अक्षय तृतीया) जैसे खुशी और परंपरा के पर्व की तैयारियां चल रही हैं, वहीं दूसरी ओर यह घातक मांझा इंसानों और पक्षियों दोनों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।


शुक्रवार शाम हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। एक 8 साल का मासूम बच्चा अपने पिता के साथ शादी की तैयारी के लिए जा रहा था, लेकिन उसे क्या पता था कि यह सफर उसका आखिरी सफर बन जाएगा। चाइनीस मांझा की चपेट में आने से उसकी जान चली गई। इस हादसे के बाद पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई और हर आंख नम हो गई।


यह कोई पहली घटना नहीं है। बीकानेर के रेस्क्यू सेंटर में भी बड़ी संख्या में ऐसे पक्षी पहुंच रहे हैं, जो चाइनीस मांझा की वजह से घायल हो चुके हैं। रेस्क्यू सेंटर के इंचार्ज सीताराम स्वामी के अनुसार, पेड़ों में फंसा यह खतरनाक धागा पक्षियों के लिए जाल बन जाता है, जिसमें उलझकर उनके पंख कट जाते हैं या वे गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। ऐसे पक्षियों का इलाज कर उन्हें बचाने की कोशिश की जाती है।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब चाइनीस मांझा पहले नहीं था, तब भी क्या हम आखातीज का त्योहार नहीं मनाते थे? क्या खुशियां मनाने के लिए किसी की जान जोखिम में डालना जरूरी है?


शहर में खुलेआम या चोरी-छुपे लालच के कारण कुछ लोग इस प्रतिबंधित मांझे की बिक्री कर रहे हैं, जिससे दूसरों के घरों की खुशियां उजड़ रही हैं। प्रशासन की सख्ती के बावजूद इसकी बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है।


समाज के हर वर्ग को अब जागरूक होने की जरूरत है। खासकर अभिभावकों को अपने बच्चों को समझाना चाहिए कि वे ऐसे खतरनाक मांझे का इस्तेमाल न करें। साथ ही, आमजन को भी एकजुट होकर इसके खिलाफ आवाज उठानी होगी।


सरकार और प्रशासन से भी मांग है कि इस गंभीर मुद्दे पर सख्त कदम उठाए जाएं और चाइनीस मांझा की बिक्री व उपयोग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसी और मासूम की जान न जाए और न ही बेजुबान पक्षियों को इसकी कीमत चुकानी पड़े।


आखिरकार, त्योहार खुशियां बांटने के लिए होते हैं, न कि किसी के जीवन को खत्म करने के लिए। अब समय है सोचने और जागने का।

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